
पंडित दिव्यांश शर्मा स्वतन्त्र पत्रकार
हरिद्वार, 28 जुलाई।
हरिद्वार कुंभ से पहले श्री पंचायती नया उदासीन अखाड़े में नया विवाद सामने आया है। पहले अखाड़े में असली-नकली संतों को लेकर चल रही खींचतान अब “असली और नकली देवताओं” के मुद्दे तक पहुंच गई है। इससे अखाड़ा परिषद के भीतर गुटबाजी तेज हो गई है और संत समाज में नई चर्चा शुरू हो गई है।
उत्तरी हरिद्वार के एक आश्रम में पंजाब से जुड़े नया उदासीन अखाड़े के संतों की बैठक हुई। बैठक में संतों ने गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि हरिद्वार स्थित नया उदासीन अखाड़े में जिन देवी-देवताओं की वर्षों से पूजा हो रही है, वे वास्तविक नहीं हैं। संतों का दावा है कि अखाड़े के असली देव स्वरूप पंजाब में स्थापित हैं और वहीं परंपरागत रूप से उनकी पूजा-अर्चना होती है।
संतों ने यह भी कहा कि बीते कुंभ मेलों में भी इन्हीं देवताओं को शाही स्नान कराया जाता रहा। इससे मूल परंपरा प्रभावित हुई है और देवताओं का अपमान हुआ है। बैठक में मौजूद संतों ने मांग की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
इस विवाद के बीच श्री पंचायती नया उदासीन अखाड़े के संत अब दूसरे अखाड़ों से समर्थन जुटाने में जुट गए हैं। उनका कहना है कि धार्मिक मर्यादा और परंपरा को बचाने के लिए संत समाज को एकजुट होना होगा। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी ने मामले को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि यह आस्था से जुड़ा विषय है, इसलिए तथ्यों के आधार पर समाधान जरूरी है। उन्होंने मांग की कि पंजाब, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश सरकारें मिलकर इस प्रकरण की राज्य स्तरीय जांच कराएं, ताकि सच्चाई सामने आ सके। अखाड़ा परिषद ने स्पष्ट किया है कि कुंभ जैसी धार्मिक परंपराओं में किसी भी तरह की भ्रांति नहीं होनी चाहिए। परिषद ने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
अब संत समाज और प्रशासन दोनों की नजर इस बात पर है कि सरकार इस मांग पर क्या कदम उठाती है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि आगामी हरिद्वार कुंभ में इस विवाद का असर धार्मिक अनुष्ठानों और शाही स्नान की परंपरा पर कितना पड़ता है। बैठक में बड़ी संख्या में पंजाब और हरिद्वार से जुड़े संत मौजूद रहे।




