
हरिद्वार, 23 अगस्त ।
पंडित दिव्यांश शर्मा स्वतन्त्र पत्रकार
हरिद्वार के अवधूत मण्डल आश्रम और जी वाटिका, ज्वालापुर में ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ विषय पर संत समागम आयोजित हुआ। कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और हरिद्वार विधायक एवं कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने सहभागिता की। पूज्य संत समाज के सानिध्य में ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ के व्यापक प्रभावों और लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर सार्थक चर्चा हुई। समागम को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ आज देश की जरूरत है। बार-बार चुनाव होने से विकास की गति बाधित होती है। उन्होंने कहा कि लगातार चुनावों के कारण स्कूलों में पढ़ाई रुकती है, प्रशासनिक मशीनरी चुनाव तैयारियों में लग जाती है और विकास कार्य धीमे पड़ जाते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक चुनावों पर लाखों करोड़ रुपये खर्च होते हैं। अगर लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होंगे तो समय और संसाधनों की बचत होगी और प्रशासन का पूरा ध्यान जनसेवा और विकास पर रहेगा। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प है और यह किसी एक पार्टी का नहीं, पूरे देश का मुद्दा है। देश पहले है, पार्टी बाद में। उन्होंने संत समाज से अपील की कि वे अपने प्रवचनों में ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ का समर्थन करें और जनजागरण में मदद करें ताकि संवैधानिक संशोधन का मार्ग सुगम बने। वंदे मातरम पर बोलते हुए चौहान ने कहा कि वंदे मातरम देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। आजादी से पहले मुस्लिम लीग के दबाव में वंदे मातरम के दो टुकड़े कर दिए गए थे, जो विभाजन का एक कारण बना। अब भारत को और विभाजित नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने संतों से वंदे मातरम के पूरे स्वरूप का समर्थन करने की अपील की। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ राजनीतिक नहीं, बल्कि राष्ट्रहित, सुशासन, जनकल्याण और संसाधनों के बेहतर उपयोग से जुड़ा विषय है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और चुनाव लोकतंत्र के पर्व हैं, लेकिन निरंतर चुनावी प्रक्रिया का असर शासन पर पड़ता है। बार-बार चुनाव से आचार संहिता लगती है और बड़ी संख्या में अधिकारियों, शिक्षकों, पुलिस और सुरक्षा बलों को चुनाव ड्यूटी में लगाना पड़ता है। एक साथ चुनाव से सार्वजनिक धन की बचत होगी और प्रशासन को विकास कार्यों के लिए अधिक समय मिलेगा। धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस विषय को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में लाया है। विकसित भारत-2047 के संकल्प के लिए विकास की निरंतर गति जरूरी है और शासन का अधिकतम समय विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर लगना चाहिए। सनातन परंपरा में संत समाज ने हमेशा राष्ट्र और समाज को दिशा दी है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि संतों का मार्गदर्शन और आशीर्वाद सभी के लिए प्रेरणादायी है। हमारा उद्देश्य है कि चुनावी प्रक्रिया को अधिक सुगम और व्यवस्थित बनाते हुए विकास और जनसेवा के कार्यों को निरंतर गति मिले। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रहित से जुड़े ऐसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श के साथ देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रभावी निर्णय लिए जाएंगे।







